हर वक्त एक ही ख्याल रहता है। हर सफर का मुकाम अलग रहता है।
यह ब्लॉग एक विचारधारा है। जिसमें लेखक की अनुभूति है, विचार है, भावनाएं हैं, संवेदनाएं हैं और अधिकारों को सचेत करने की आशा है।
Wednesday, 6 July 2011
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अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष - 2023
भारत गावों का, किसान का देश है। भारत जब आज़ाद हुआ तो वह खण्ड-2 था, बहुत सी रियासतें, रजवाड़े देश के अलग-अलग भू-खण्डों पर अपना वर्चस्व जमाएं ...
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छोटी- छोटी आंखे है उसकी, छोटे-छोटे हाथ। कभी भी मुस्कुरा देती है, बिना किसी के साथ।। उसे न किसी की बात सुहाए, न भाए बरसात। वह अपनी ही ...
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छोटे से गमले में लगा हुआ है रबड़ का पेड़। यदि गौर करे तो हजारों नज़रे इस तरह के पेड़ देख सकतीं हैं। जो किसी ना किसी चुन्ने से गमले मे...
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सुंदरलाल जितने जुझारू और प्रकृति की रक्षा के लिए सक्रीय थे, उतने ही सरल, सौम् य और चिंतन-मनन करने वाले। प्रकृति के उपासक सुंदर लाल बहुगुणा...
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